बहुत कुछ 'अन-डू' नहीं हो पाता

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी के बारे में कोई भी ऊल-जुलूल बोल या लिख देने से कुछ क्षणों के लिए वक्ता या लेखक जरूर चर्चा में आ सकता है या अपने लिखे पर कुछ अतिरिक्त टिप्पणियां पा सकता है, लेकिन वह स्वयं भी जानता है कि उसने ऐसा कर कोई महान कार... [पूरी पोस्ट]
writer "SHUBHDA"
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[05 Apr 2009 16:17 PM]

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