अलग रही है.............(बवाल)
जो बख़्ते-खुफ़्त: सी लग रही है, वो रफ़्त : रफ़्त: सुलग रही है ! मेरी कहानी ज़माने वालों, अज़ल से ही कुछ अलग रही है !! ---बवाल बख़्ते-खुफ़्त: = सोया हुआ भाग्य रफ़्त: रफ़्त: = आहिस्ता आहिस्ता अज़ल = अनादिकाल...
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बवाल
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[05 Apr 2009 14:58 PM]



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