आज दर्द की प्रिया बनी हुयी है जिंदगी
आज दर्द की प्रिया बनी हुयी है जिंदगी अभाव की उडी पतंग , जिंदगी के गांव में पल रही मुसीबते , बरगदों की छांव मे आह भर रही बहार , पतझरों के द्वार पर स्वार्थों के पेड से बंधी हुयी है जिंदगी आज दर्द की प्रिया बनी हुयी है जिंदगी धो रही नसीब आंख आंसुओं की ध...
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डा. उदय ’ मणि ’
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[05 Apr 2009 14:55 PM]



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