कुछ अलग
अभी मैंने योगेन्द्र सिंह राठौर की कविता पढ़ी । बिल्कुल अलग उपमान हैं इसमे और बिम्ब भी नया , इसलिए आपसब के लिए प्रस्तुत है- इश्क, एक सिगरेट के पैकेट की तरह, चेतावनी ऊपर लिखी हुई, फिर भी प्रोफेसर से लेकर, वैज्ञानिक तक पीते हैं, और प्रेमिका, उंंगलियों मे...
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shelley
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[05 Apr 2009 07:42 AM]



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