मत क्रय : लोकतंत्र की एक और पराजय

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) लोकतंत्र की अपनी श्रेष्ठताओं के बीच कई त्रुटियां भी हैं। जैसेकि संख्या-बल की महत्ता अक्सर ही नैतिक आदर्शों को हाशिये पर धकेल देती हैं। संख्या-बल के ही कारण भारतीय लोकतंत्र जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद और (धार्मिक) आस्थावाद के अवसादों से ग्रस्त हैं। इस... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[05 Apr 2009 01:08 AM]

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