आराम कहाँ
आराम कहाँ अब जीवन में अरमान अधूरे रह जाते | दिल की धड़कन शेष रहे हाथों के तोते उड़ जाते || तिल-तिल कर तन की त्याग तपस्या का अमृत संचय करते | अमिय भरे रस कुम्भ कभी यदि माया की ठोकर खाते || सागर में सीपें खोज-खोज माला में मोती पोये थे | पर हाय ! अचानक ट...
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.राजुल शेखावत
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[04 Apr 2009 23:55 PM]



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