तुम हो मित्रता...
तुम हो एक सुंदर अनुभूति अनुभूति से उपजी, पावन स्मृति स्मृति में---- कुछ हँसी-खुशी, कुछ मीठे झगड़े और इन सबमें बहती निश्छलता निश्छलता प्रेम सी पवित्र और इसी पवित्रता को कहते हैं मित्रता तो सुनो मित्र! "मित्रता जब तुममें सिमट जाए, तो तुम मित्र से, ऊपर उ...
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Jyotsna Pandey
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[04 Apr 2009 22:42 PM]



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