''पुष्प की अभिलाषा''

अपना पराया चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊँ. चाह नहीं प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ . चाह नहीं सम्राटों के शव पर, हे हरि डाला जाऊँ. चाह नहीं देवों के सिर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊं . मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फ़ेंक. मातृभूमि पर श... [पूरी पोस्ट]
writer ram shankar
views
23
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[04 Apr 2009 11:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix