वादा तेरा वादा, वादे पे तेरे..............।
लगभग सभी दलों ने जनता से वोट पाने के लिए वादे कर डाले हैं। सिर्फ पांच साल बाद ही वादों का यह मेला लगता है। और हर बार जनता को मूर्ख बनाने के भरपूर प्रयास ( वायदे ) यह सोचकर किए जाते हैं कि जनता को पिछला कुछ याद नहीं रहता। बेचारी जनता भी आखिर भूले नहीं...
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डा.मान्धाता सिंह
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[03 Apr 2009 14:42 PM]



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