फ़िराक़ की शायरी का चलता फ़िरता एनसाइक्लोपीडिया
ज़िन्दगी में कई मुलाक़ातें इतनी अनायास होती है कि जब तक आप उस शख़्स को जानें उसे पहचानें और उसके कुछ नज़दीक आएं,समय अपना खेल खेल जाता है. आज एक मुलाक़ात पर जिनकी बात कर रहा हूँ वे भी कुछ ऐसे ही मिले और बस चले गए.इतनी दूर जहाँ से कोई वापस नहीं आता. गोवर्धन...
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संजय पटेल...
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[02 Apr 2009 23:50 PM]



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