क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो

आज़ाद लब आपको आज एक शेर सुनाता हूँ जिसके बारे में मैं चाहूंगा कि आप लोग कुछ समझें . बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने आपसे बड़े ज्ञानी(?) तनख्वाह पर रख लिए थे. लेकिन ये शेर अब भी पढ़ने-लिखने वालों के बीच (टुच्चे मूर्खों (चंद वर्षों पहले मूर्खता भी एक वैल्यू हुआ करती थ... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[02 Apr 2009 16:09 PM]

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