मत कराओ प्रतीक्षा...
अप्रैल 09 न जाने कब तक लिखता रहूंगा यूं ही बेचैन निगाहों से एक टक! कुछ तलाशता हुआ शायद नजर आ जाए कभी छवि तुम्हारी भटकने से पहले संभाल ले जाएं मुझे बाहें तुम्हारी कहते हैं फल मीठा होता है प्रतीक्षा का बेहद बाढ़ सी आई है गमों की मेरी जिन्दगी में शायद ब...
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अनिल कुमार वर्मा
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[02 Apr 2009 13:11 PM]



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