उपलब्धियां ही उपलब्धियां !!! (व्यंग्य कविता)
किसी को जानना हो अगर आज़ादी के बाद देश की उपलब्धियां देश के गाँव-गाँव में घूम आइये जहाँ भी सुनें दो जून की रोटी के लिए किसानों-मजदूरों-गरीबों का हाहाकार वहाँ उपलब्धियां ही उपलब्धियां ! अजी कभी देश के महानगरों का एक चक्कर लगा आइये आसमान को छूती आलीशान...
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DEEPAK
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[02 Apr 2009 08:31 AM]



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