मेहरबां को हुआ आज क्या देखिये - ग़ज़ल

मैं समय हूँ ... मेहरबां को हुआ आज क्या देखिये कर दिये गम हज़ारों अता देखिये भूख दी , प्यास दी, दी हैं मजबूरियां और क्या देगा हमको खुदा देखिये जख्म गहरे है , दर्दो का अंबार है फ़िर भी हंसते हैं हम, हौसला देखिये जिस अदा ने मेरे दिल को घायल किया आइने मे वो अपनी अदा देखिय... [पूरी पोस्ट]
writer डा. उदय ’ मणि ’
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[02 Apr 2009 03:28 AM]

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