जब सांझ की बेला होती है...

संवेदना मार्च 09 जब सांझ की बेला होती है में इस पीपल के साए में तालाब के तट पर आता हूं हम दोनों जहां पे मिलते थे दो पल के लिए दो क्षण के लिए फिर मिल के बिछड़ जाते थे हम इस बार मगर यूं बिछड़े हैं जैसे न कभी मिल पाए हों इस बार जो तट पर आया हूं दो पल के मिलन की... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
views
19
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
5
[01 Apr 2009 11:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix