ज़राबख्तर
मैंने दोस्ती का ज़राबख्तर पहन लिया है और नंगे बदन को अब कुछ नहीं छूता न दुश्मन का हाथ छूता है न मेरे दोस्त की बाहें मैंने दोस्ती का ज़राबख्तर लिया है मैं खुश हूँ , पर आप क्यों पूछते हैं कि कुछ खुशियाँ इतनी उदास क्यों होती है ? अभी कुछ उड़ती चिडियाँ म...
[पूरी पोस्ट]
रंजना [रंजू भाटिया]
21
2
0
2
12
[01 Apr 2009 08:24 AM]



Shuffle








