आज तेरी हर कोशिश तेरी तक़दीर बनना चाहती है

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... आज तेरी हर कोशिश तेरी तक़दीर बनना चाहती है, तेरी कही हर बात तेरे हाथ की लकीर बनना चाहती है, एक कदम उठाने की देर है, हर डगर तेरी हमसफर बनना चाहती है, हर सफर की शुरुआत पहले कदम से ही होती है, एक चिंगारी ही आग को भड़काती है, जो कर रहे हो, गर उस पर और खु... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[01 Apr 2009 05:52 AM]

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