जब कोई महबूबा चांदनी ओढ़कर उतरती है तो कैसी लगती है....
सुबह मेहँदी महक रही थी बिस्तर पर मैं तो रातरानी सिरहाने रखकर सोया था होंठों पर गर्म साँसें अभी भी दहक रही थीं और पलकों पर आज फिर एक मोती झिलमिलाया था खुली खिड़की से जब झाँका था मैंने तो आसमा के आखिरी कोने पर लहराता दिखा था तुम्हारा रेशमी आँचल , जिसका...
[पूरी पोस्ट]
pallavi trivedi
69
7
0
7
25
[01 Apr 2009 03:33 AM]



Shuffle








