छलक ना जाए लहू
इश्क में फूल चुने थे जो तेरी आंखों से ! बनके अब शूल उगे हैं वो मेरी आंखों से !! काँप जाती है मेरी रूह वफ़ा की बातों से ! छलक ना जाए लहू दिल का मेरी आंखों से !! मिलाई तुमसे नज़र हम ये भूल कर बैठे ! छिन गए सारे हसीं ख्वाब मेरी आंखों से !! है ये हस्ती- ए-...
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निर्झर'नीर
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[01 Apr 2009 03:20 AM]



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