मेरी पसंद
कुछ मेरी पसंद के पंक्तियां हैं आप भी पढ़िए... पुण्य हूं न पाप हूं जो भी हूं अपने आप हूं अंतर देता दाह जलने लगता हूं अंतर देता राह चलने लगता हूं ----------- ये माना की गुलशन लूटा और नशेमन जला फिर भी कुछ तो बाकी निशां रह गया तिनके तिनके चुनकर फिर बना ल...
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VIDYUT MAURYA
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[31 Mar 2009 16:49 PM]



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