सपनों की कब्रगाह है-बॉलीवुड..

मुसाफ़िर इस मायानगरी में कई पहुंचे पर हर जुम्मे चढ़ते-उतारते सूरज के साथ ही अपने वजूद को बनाते-तलाशते खो गए"- कुछ को उनकी मन-माफिक ज़मीन नहीं मिली कुछ को सही पहचान.जज्बे और जीवट वाला यहाँ फिर भी रुके और खुद को बनाने की जुगत में लगे रहे.यह बात तो सभी को मालुम... [पूरी पोस्ट]
writer मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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[31 Mar 2009 10:13 AM]

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