देगा तो कपाल,क्या करेगा गोपाल? (छतीसगढ की एक लोककथा)

धर्म यात्रा दो मित्र थे। एक ब्राह्राण और दूसरा भाट। भाट ने एक दिन अपने मित्र से कहा , “ चलो , राजा के दरबार में चलें। यदि गोपाल राजा खुश हो गया तो हमारे भाग्य खुल जायेंगे।” ब्राह्राण ने हंसकर उसकी बात टालते हुए कहा , “ देगा तो कपाल , क्या करेगा गोपाल ?  अर्... [पूरी पोस्ट]
writer Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[31 Mar 2009 09:31 AM]

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