अपना अफसाना
बहुत दिनों से ये चाह रहा था ; कि, अपना अफसाना लिखूं... और मेरा अफसाना भी क्या है कुछ तेरे जैसा है , कुछ उसके जैसा है दुनिया की भीड़ में भटकता हुआ ज़िन्दगी के जंगल में खोया हुआ किसी बच्चे की हंसी में मुस्कराता हुआ और अपनी उदासी को समेटता हुआ एक अदद इं...
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Vijay Kumar Sappatti
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[31 Mar 2009 08:18 AM]



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