उन्मुक्त शंखनाद

संचिका अपशब्द सुनने को मैं तैयार हूँ दुश्चरित्र कहो या कुल कलंकिनी मुझे कष्ट की नहीं परवाह है आहुति बनाने का प्रण कर लिया है तोड़ के पुवाग्रहों की बेडिया मैंने विद्रोहिणी बनने का मन कर लिया है मेरा दोष क्या था बताओ मुझ अबला को अपशगुनी कहा गया उजड़ा मेरा ही सु... [पूरी पोस्ट]
writer लवली कुमारी / Lovely kumari
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[31 Mar 2009 02:20 AM]

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