जब वो एक साथ भागते पैबन्द लगाने....

काहे को ब्याहे बिदेस.... वो दोनों पैबन्द सिल रहे थे, बिखरे आकाश पर,परों तले खिसक गई ज़मी पर, किताब के फटे पन्नो पर, आखों से गुम हुए सपनो पर, चौखट पर सिमट आई पगडण्डी पर,जागी हुई इंसानियत पर और मासूम चाहत पर... वह इसलिए पैबन्द लगाता है क्योंकि उसे दुःख है उसे दुःख पहुंचाने का... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[30 Mar 2009 16:57 PM]

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