कभी दमदार कोशिश बेनतीजा हो नही सकती - मुक्तक

मैं समय हूँ ... कोटा मे हुये तीन दिवसीय नाट्य समारोह का संचालन करते हुये, शहर मे एक ओडीटोरियम की माग के संदर्भ मे कुछ एक मुक्तक लिखने मे आये - देखियेगा ये नाटक ये रंगकर्म तो , केवल एक बहाना है हम लोगों का असली मकसद सूरज नया उगाना है कभी मुस्कान चेहरे से हमारे खो नही... [पूरी पोस्ट]
writer डा. उदय ’ मणि ’
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[30 Mar 2009 15:16 PM]

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