मेरा घर खुश्बुओं का घर होगा ...
परम आदरणीय और मेरे गुरु जी श्री पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से तैयार ये ग़ज़ल आप सभी के प्यार और आशीवाद के लिए प्रतीक्षारत .... हाय वो वक्त किस कदर होगा मेरा मेहबूब मेरे घर होगा दिल हमारा है प्रेम का मंदिर हम पे नफरत का ना असर होगा घर बनाते हैं पत्थर...
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"अर्श"
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[30 Mar 2009 03:22 AM]



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