भभक उठा जो क्रोध
भभक उठा जो क्रोध , भस्म हो गयी मति , सती हुई विमर्श की विरल विडंबना। रक्त रक्त हो गया , विधी विरक्त हो गया , प्रहार के , संहार के , श्रंगार में है संजना। घमण्ड है प्रचण्ड , मुण्ड दर्प सर्प कुण्डलित , लोभ , मोह , प्राप्ति से हो रहे नयन ललित , शुचित लग...
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RUPAK_REWA
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[29 Mar 2009 18:03 PM]



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