बेहतर उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी अब मतदाताओं पर

surendrakishore अब गेंद एक बार फिर मतदाताओं के ही पाले में है। इस देश के नेताओं और दलों ने एक बार फिर अपना ही सर्वदलीय वादा भुला दिया है। आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर सन् 1997 में संसद के भीतर देश से यह सर्वदलीय वादा किया गया था कि ‘राजनीति का अपराधीकरण और भ्रष्... [पूरी पोस्ट]
writer Surendra Kishore
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[29 Mar 2009 13:24 PM]

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