चिट्ठी का जवाब तत्काल से पहले देने वाले बालकवि बैरागी.
वैसे उनसे कम ही मिलना होता है क्योंकि वे ठहरे यायावर-कवि.कभी यहाँ कभी वहाँ.वे मेरे मालवा के हैं और मेरे घर के बुज़ुर्ग लगते हैं.सरस्वती हमेशा से उन पर मेहरबान रही है. वे हैं देश के जाने माने कवि श्री बालकवि बैरागी. हम उन्हें प्यार से दादा बालकविजी कहत...
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संजय पटेल
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[29 Mar 2009 13:20 PM]



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