यह तो मेरे ख्याबों का भारत नहीं...

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) भारतीय लोकतंत्र का महासमर शुरू हो चुका हैं। जिस प्रकार होलिका दहन के पश्चात् होली शुरू हो जाती हैं उसी प्रकार चुनाव आयोग की घोषणा के बाद भारतीय लोकतंत्र में कीचड़ उछाल होली शुरू हो चुकी हैं... परन्तु भारतीय लोकतंत्र तो शर्मसार करने के लिए वरुण गाँधी... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[29 Mar 2009 01:06 AM]

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