तेंदुलकर और मैं
क्रिकेट ज्यादातर हिन्दुस्तानियों के जीवन का अटूट हिस्सा है। इसलिए जब २००७ विश्व कप मैं ब्रियन लारा ने सन्यास की घोषणा करी तो मेरा मन दुखी हो चला। एक एहसास हुआ की एक पीढी बीत गए है। मैंने अपने परम मित्र राका को फ़ोन लगाया की "यार हम कितने lucky है की...
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Gaurav Pandey
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[28 Mar 2009 20:43 PM]



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