तेरी किताब की ऐसी तैसी

विनय पत्रिका रहूँगा न मैं घर के भीतर घर किताबों से भर सा गया है। हर तरफ मेरी किताबें...मेरे लिए किताबें। थक रहा हूँ किताबों से। ऊब सी न हो जाए उसके पहले सोच रहा हूँ कि किताबों की खरीद पर रोक लगा दूँ। मेरे पास जिनकी किताबें हैं उन्हें बजिद लौटा रहा हूँ। प्रकाशकों... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व
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[28 Mar 2009 10:44 AM]

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