LOVE STORY # 467 : दुःख की लम्बी एफआईआर होती, खुशी का न ठौर न ठिकाना
उसकी डायरी में उसने कभी झांक कर नहीं देखा. कहती है मर जाऊंगी तो पढ़ लेना. पर कभी कभी खुद ही से कुछ एंट्रीज बांट लेती है. पता नहीं वे पूरे पन्ने होते हैं या कुछ पैराग्राफ ही. जब ज़िंदगी को जिया जा रहा होता तकलीफ़ और राहत के बीच, तो डायरी छोटी हो जाती,...
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आस्तीन का अजगर
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[28 Mar 2009 06:19 AM]



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