तीर-तुक्कों के भरोसे

तिश्नगी एक सुबह मैंने अपने पड़ोसी वर्मा जी को बोरिया बिस्तर लेकर फ्लैट से निकलते हुए देखा। मुङो थोड़ा आश्चर्य हुआ। मैंने उन्हें टोका- वर्मा जी सुबह-सुबह अचानक कहां चल दिए? उन्होंने बुरा-सा मुंह बनाते हुए कहा-मैं अगले कुछ महीनों के लिए बाहर जा रहा हूं। जवाब स... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश चंद्र
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[28 Mar 2009 05:04 AM]

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