एक बस के इंतज़ार में

उपस्थित नए घर की देहरी पर कदम रखते ही मीता के मन में स्मृतियों की कौंध चमक उठी . पिता का घर अब उसका पीहर था . अब तक पिता हर मौसम में उसके पीछे छाता लेकर खड़े रहते थे । भाई का मज़बूत कन्धा आश्वस्त करता था । माँ का दुलार घर और दुनिया के बीच उसकी बेरोकटोक आवाजाह... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[27 Mar 2009 23:42 PM]

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