फूल भी हो दरमियाँ तो फासले हुए !

ek kahani - aav, bhaav aur prabhaav ki ! ईमेल दूसरी बार खोला .....सोच कर की शिष्टता के लिए ही सही , जवाब तो देना चाहिए | पर फिर से बंद कर दिया .. नहीं , क्या फायदा ...फिर से वही होगा ....नो, नॉट अगेन ...... जब से विश्वास टूटा है , दोस्तों पर से , दोस्ती पर से , किसी से हँस के बात करने को भी... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[27 Mar 2009 19:12 PM]

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