अलविदा-ए-दोस्त...

संवेदना मार्च 09 अलविदा ए दोस्त जाने फिर कहां हो सामना जा रहे हो तुम न जाने कौन बस्ती किस शहर दरमियां बस एक पटरी चन्द डिब्बे हैं तो क्या दूरियां हजारों मील की इनमें आईं आज उभर पोंछ डालो आंख का पानी न देखो फिर से घूमकर याद की खामोशियां होंगी हमारा हमसफर... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[27 Mar 2009 09:36 AM]

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