मेरा परिचय
मैं तुम पर आश्रित नहीं स्वयं सिद्धा हूँ तुम्हारे स्नेह को पाकर ना जाने क्यों कमजोर हो जाती हूँ स्वयं को बहुत असहाय पाती हूँ शायद इसलिए तुम्हारे हर स्पर्ष में प्रेम की अनुभूति होती है उस प्रेम को पाकर मैं मालामाल हो जाती हूँ और अपनी उस दौलत पर फूली नह...
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शोभा
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[27 Mar 2009 07:13 AM]



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