एक पागल सी लड़‌की

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... एक पागल सी लड़‌की, दिल टूटने से डरती थी, हर पल, हर लम्हा खुद से वो झगड़ती थी, आँसू क्यों आए किसी की आँख में, मुजरिम खुद को वो समझती थी, सबको खुश रखना चाहती थी, खुद घुट-घुट के रहती थी, सौ बार समझाया उसे, कहा कि ऐ नादान लड़की, दुनिया को देखना छोड़ दे,... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[27 Mar 2009 01:43 AM]

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