ख्वाब की दस्तक ने खोले बंद यादों के किवाड़ - 1
एक रोज काम के बोझ से थका ट्रेन में आंखें मूँदे बैठ वापस लौट रहा था तब अचानक मुझे सुनायी दिया, “ताना ना न न ना, ताना ना न न ना”। ऐसा लगा जैसे किसी ने घंटी बजायी हो उठा किवाड़ खोले, सामने कोई नही था। इधर उधर झाँक कर देखा एक बच्ची खिलखिलाकर...
[पूरी पोस्ट]
Tarun
29
3
0
3
7
[26 Mar 2009 19:50 PM]



Shuffle








