तैमूर तुम्हारा घोड़ा किधर है ?

प्रत्यक्षा बूढ़ा गरम कपड़ों में लिपटा , पनियायी आँखों से देखता है , जीवन जो बीत चुका । अब और कुछ नहीं है इंतज़ार के सिवा । चाय की प्याली से हाथ सेंकता सोचता है अब भी वही तीस साल का फुर्तीला जोशीला लड़का कुँडली मार कर बैठा है भीतर । क्या होगा उसका मृत्यु के बाद । ये... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[26 Mar 2009 08:22 AM]

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