नही जाना मुझे रवि के पार
जब से कविता लिखने का मोह मन में पाला है या कहें कि होश संभाला है सुनती आई बडी पुरानी वाणी एक कवि की जीवन कहानी जहां रवि नहीं जा पाता है वहां कवि पहुँच जाता है बुन लेता है कल्पनाओं की चादर चढा लेता है भावनाओं का मुल्लमा गढ लेता है नए शब्द हृदय के गर्भ...
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सीमा सचदेव
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[26 Mar 2009 07:59 AM]



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