अक्षरों का यथार्थ ............
कुछ लेखकों को पढ़ते पढ़ते कई बार ऐसा होता है, जब अक्षर अपने होने का अहसास दिलाते हैं। कई अक्षर बाहर से कुछ और दिखते हैं, उनके भीतर उतर कर देखो तो उनके अर्थ कुछ और ही होते हैं। ऐसे ही कई अक्षरों ने मेरी रूह को छू लिया............
विमल मित्र की कहानी ´घर...
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MANVINDER BHIMBER
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[26 Mar 2009 05:09 AM]



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