उस देखे की मौन भाषा
व्यास हिमाचल को रूप देती है, आकार देती है. शील, सैन, संस्कार देती है. व्यास तीरे मैं उसे देखता रहा, सुनता रहा. कहते हैं कि वशिष्ठ ने पुत्रशोक से विह्वल होकर अपने को रस्सी में बांध यहीं-कहीं व्यास में छोड़ दिया था. इस गंभीरा नदी ने वशिष्ठ को पाश...
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Geet Chaturvedi
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[25 Mar 2009 17:05 PM]



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