हँसता हुआ आया वन में ललित वसन्त
हँसता हुआ आया वन में ललित वसंतहँसता हुआ आया वन में ललित वसन्त डॉ. कविता वाचक्नवीवसंत पंचमी। सूरज ने करवट बदली। कुहासे ने रजाई तहाई। भरपूर अंगड़ाई लेकर धरती जाग उठी। दुबक कर सोए उसके अद्भुत रूप की छ्टा जो फैली तो सारी प्रकृति अपने समस्त साधनों से उसके...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[25 Mar 2009 15:21 PM]



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