और प्यार क्या और प्यार कहां...

संवेदना मार्च 09 यूं तो प्यार पर इतना कुछ लिखा जा चुका है कि कहने को शायद ही कुछ शेष बचा हो...लेकिन हर बार जब इस विषय पर कुछ लिखा जाता है तो वो नया ही लगता है...ढाई अक्षर के इस शब्द की महिमा ही ऐसी है...इसीलिए मैं आज फिर इस प्यार को परिभाषित करने बैठ गया हूं... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[25 Mar 2009 11:11 AM]

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