"जीवन की परिभाषा है"

जीवन की परिभाषा है कुछ सोची, कुछ आशा है है जीवन में क्या कुछ सोचों कुछ अधूरे किस्से, कुछ पाने की आशा है, कहाँ ठहर गए सब किस्से कहाँ रुके हैं सब अब भी खोना था जो, वो खो बैठे अब तो बस पाने की आशा है। दुनिया बहुत बड़ी है मित्रो आँखों में ये न समाएगी, करन... [पूरी पोस्ट]
writer Lokendra
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[25 Mar 2009 08:32 AM]

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