सुदिन की याद नहीं चाहती थीं पांती काकी
पांती काकी के लिए प्राथना करें आखिर हम सब की पंता या पांती काकी विदा हुई । खूब धूमधाम से उनके सारे संस्कार किए गए। ब्रह्म भोज हुआ। महापात्र विदा हुए। दो तीन बार गऊ दान हुआ। एक तीन बाई डेढ़ की वैकल्पिक वैतरनी बनाकर गऊ की पूछ पकड़ काकी के स्वर्ग पहुँचन...
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बोधिसत्व
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[25 Mar 2009 08:15 AM]



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