आँखों में जिसके खौफ का साया बना रहा
आँखों में जिसके खौफ का साया बना रहा वो शख्स इसके बाद भी अपना बना रहा अपने तमाम रिश्ते ही छुटे हुए लगे मेरा वजूद मुझसे ही तन्हा बना रहा अब उसके इन्तिखाब का होता कहाँ यकी दिल में था , जिसके ख्वाब का चेहरा बना रहा शामिल रही सफर में भी अपनी उदासिया चाहत...
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Rahul kundra
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[25 Mar 2009 03:17 AM]



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